कल्पना शक्ति

 कल्पना शक्ति 

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एक बार की बात है एक लेखक की किताब की पठनोपरांत प्रशंसा करते हुए पाठक ने पत्र लिखा।

महोदय आपकी लेखनी अप्रतिम है। 

प्रशंसनीय है आप अपने अन्दर इतनी सारी कल्पना शक्ति कहां से लाते हैं? जो आप इतनी अच्छी किताबें लिख पाते हैं।

सोच विचार के उपरांत लेखक ने पाठक को जबावी पत्र लिखा।

बन्धु! हमारे पास लिखने की कोई शक्ति वक्ति नहीं है।

यह जो मेरी लिखने की प्रेरणा है वह मेरी पत्नी कल्पना से मिलती है।

क्योंकि मेरी पत्नी मुझे रोज प्रतारित करती रहती है, और मैं उन प्रतारनाओं को कलम्बध करता रहता हूॅं बस।

इति प्रसिद्ध लेखक।

©® भुवनेश्वर चौरसिया "भुनेश"

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