कल्पना शक्ति ----------------- एक बार की बात है एक लेखक की किताब पर पठनोपरांत प्रशंसा करते हुए पाठक ने पत्र लिखा- "महोदय आपकी लेखनी अप्रतिम है। प्रशंसनीय है आप अपने अन्दर इतनी सारी कल्पना शक्ति कहां से लाते हैं? जो आप इतनी अच्छी किताबें लिख पाते हैं?" सोच विचार के उपरांत लेखक ने पाठक को जबावी पत्र लिखा- आपका पत्र मेरे हाथों में आया, और उसमें निहित प्रशंसा ने मेरे मन को एक क्षण के लिए ठिठकने को बाध्य किया। आपने मेरी लेखनी को अप्रतिम कहा, मेरी कल्पना शक्ति एवं स्रोत की खोज की। यह प्रश्न, जो सतह पर सरल प्रतीत होता है, मेरे लिए एक गहन आत्म-निरीक्षण का कारण बन गया। आप पूछते हैं कि यह सृजन का स्रोत, यह कथाओं का उद्गम, कहाँ से आता है, जो मेरी पुस्तकों को जीवन देता है? मैं इसका उत्तर देने का प्रयास करता हूँ, पर शायद वह उत्तर उतना रहस्यमय नहीं जितना आप कल्पना करते हैं। मित्र, मेरे पास कोई अलौकिक शक्ति नहीं, न ही कोई ऐसी जादुई छड़ी जो अनायास ही शब्दों को कागज पर नचाती हो। मेरी लेखनी का रहस्य, यदि इसे रहस्य कहें, मेरे जीवन की उस साधारण किंतु जटिल सत्यता में छिपा है, जो मेरे...