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नकल

 नकल  --------- एक घर के बाहर दरवाजे पर लिखा था डिलिवरी बुआय नोट अलाउड।  एक लेखक वहां से गुजर रहा था। लेखक चिंता में पड़ गया। काफी सोच-विचार करने के बाद उसे याद आया हो न हो इ घर का आदमी अमिताभ की फिल्में बहुत देखता होगा।  अमिताभ के किसी फिल्म में एक डायलॉग था।डाग एंड इंडियन नोट अलाउड।  छिह  दुनिया में कैसे- कैसे लोग हैं। दूसरों की नकल करने से भी परहेज़ नहीं करते। ©® भुवनेश्वर चौरसिया 

छुट्टी

  छुट्टी ------ आज दशहरे की छुट्टी थी सब लोग घर पर थे और मैं काम पर जा रहा था । दवा कम्पनी में नौकरी करता हूं दवा कम्पनियां त्योहारों की छुट्टियां नहीं देती । और छुट्टियों के अलग से पैसा भी नहीं देती। मेरा पड़ोसी बोला अरे चौरसिया जी ये छुट्टी के दिन भी सुबह-सुबह लंच बॉक्स लेकर कहां चले? मैं ने कहा जी कुछ जिन्दगियां बचाने बोले वो कैसे? मैं ने कहा जी ! मैं एक दवा सप्लाई करने वाली कंपनी में फिल्ड वर्कर हूं मेरा काम दुकानों तक अस्पतालों तक दवाईयां पहुंचाना होता है और आज के इस बीमार युग में जहां दुनियाभर के लोग रोटी से ज्यादा दवाईयां खाता हो और यदि मेरी वजह से किसी के पास दवाईयां नहीं पहुंचती है और किसी को कुछ हो जाता है तो मुझे बहुत दुःख होगा। पड़ोसी बोला आपको क्यों दुःख होगा? मैं ने कहा पिछले दिनों एक अस्पताल में दवाई देने गया वहां किसी दूसरी दवा एजेंसी से किसी मरीज को दी जाने वाली दवाइयां आनी थी वह समय पर नहीं पहुंचा तब एक आदमी असमय ईश्वर के पास पहुंच गया उस दिन कसम खाई चाहे आंधी बारिश तूफान ही क्यों न आ जाए मुझे काम पर जाना ही होगा चाहे इस छुट्टी वाले दिन क...

प्रेरक प्रसंग

 प्रेरक प्रसंग ---------- मेरा एक मित्र अपने बेटे की पढ़ाई से इतना संतुष्ट था कि प्रसंशा करते नहीं थकता था। मिले हुए कई दिन बीत गए तो मिलने पहुंचा। बातों का सिलसिला चल निकला, अभी चाय पीना शुरू ही किया था कि तभी मित्र का बबुआ आ धमका नमस्ते अंकल औपचारिकता निभाने के क्रम में मैं भी उसे नमस्ते नमस्ते कह कर संबोधित किया। बातों बातों में पढ़ाई-लिखाई की बात निकल पड़ी कौन सी कक्षा में पढ़ते हो यह पूछना वाजिब नहीं लगा। तारीफ तो मित्र ने पहले ही कर दिया था। मित्र के बेटे से कहा- पाठ्य पुस्तकों में साहित्य तो अवश्य पढ़ते होंगे। मित्र के बेटे ने हामी भरी जी अंकल। मैं ने कहा- मेरे दिमाग में एक प्रश्न दौड़ लगा रहा है पूछूं उत्तर दोगे। मित्र के बेटे ने हामी भरी जी अंकल। मैं ने कहा- हिन्दी के दो ऐसे प्रसिद्ध साहित्यकारों के नाम बताओ जिनके नाम के आगे 'काका' लगा हो। मित्र बीच में बोल पड़ा इतना छोटा सवाल ये तो मेरा बेटा चुटकी में हल कर देगा। मित्र का बबुआ काफी देर तक इधर-उधर नज़र दौड़ाता रहा लेकिन उत्तर न दे सका। मित्र अपने बेटे को लगा अनाप-शनाप बकने। बड़ी मुश्किल से चुप कराया, हालांकि उत्तर मित्...

भ्रम

 भ्रम ******************* अच्छे की चाह में बुरा बना आदमी जब आई होशो हवास तो कहां खरा आदमी कह रहा था वो मसखरा सभी रास्ते बस वहीं तक जाता है जहां से चला आदमी  नेक नीयती के शब्द झूठे लगे सच्चाई की राह पर देखो भूखों मरा आदमी अस्मत लूटी बला की खूबसूरती पर वेबा की सब लोग कह रहे देख लो वो कहां गिरा आदमी ईश्वर अंधा पाप पे पुण्य पे देता है कष्ट भी  जो दिल से नेक है नाहक सजा उसे ही मिलता बदी किया फला फूला लो पाप का घड़ा भरा   आदमी ही आदमी को पालता है भ्रम बस । ©®भुवनेश्वर चौरसिया *भुनेश*

जे हम जानतिह

  जे हम जानतिह --------------------- गाम भरि कऽ बच्चा बुतरूक बूढ़ जवान सभ डेग भरैत सरपट गाम सॅं बाहर भागि रहल अछि। मुद्दाक बात ई जे केकरो किछ पता नै कि की भेलय? हो हो ला ला हुआ हुआ। लुक्खड़ कक्आ निसन्न चुप बैसल अछि। पीछू पीछू हमरो जिज्ञासा भेल बात कि अछि तकड़ टोह लेल जाय। भागैत एकटा बुतरू भेंटल यौ रूकु -रूकु कनि दम धरू कि भेलय? हमरो जनबाक जिज्ञासा अछि। बुतरू रूकल बाजल बुझान परै ये अहाॅं इ गाम मेॅ नै रहैय छी कि? लज्या भेल। कत नम्हर सवाल अछि अहि बुतरूक। हे बौआ अहाॅं कि बजय छी यौ? हम तऽ अहि गाम केर छी। हे छिन्न मस्तिका सद्बुद्धि दियौ अहि बुतरूक। आब बुतरूक हाफनाय रूकल। अनर्थ भऽ गेलय यौ,बुतरू बाजल। हम्म कि अनर्थ भऽ गेलय? बुतरू बाजल राम दुलार मास्टर साहेब आब अई धरती पर नै रहलाह। हम्म कि भेलेन मास्टर साहेब के? बुतरू फांसी खाई के अप्पन इह लिला समाप्त कऽ लेलखिन्ह। हम्म किअय यौ? बुतरु बाजल जमीन जायदादक गौतियारी झगड़ा छलेन। हम्म तऽ आब जमीन जायदाद साथ नेने जैयथिन मास्टर साहेब। बुतरू नै। फेर अहाॅं ओम्हर कियेक हाफैत जाइ छियै। बुतरू अंतिम दर्शन करबाक लेल। हम अहाॅंक मास्टर ...

कल्पना शक्ति

 कल्पना शक्ति  ----------------- एक बार की बात है एक लेखक की किताब पर पठनोपरांत प्रशंसा करते हुए पाठक ने पत्र लिखा- "महोदय आपकी लेखनी अप्रतिम है।  प्रशंसनीय है आप अपने अन्दर इतनी सारी कल्पना शक्ति कहां से लाते हैं? जो आप इतनी अच्छी किताबें लिख पाते हैं?" सोच विचार के उपरांत लेखक ने पाठक को जबावी पत्र लिखा- आपका पत्र मेरे हाथों में आया, और उसमें निहित प्रशंसा ने मेरे मन को एक क्षण के लिए ठिठकने को बाध्य किया। आपने मेरी लेखनी को अप्रतिम कहा, मेरी कल्पना शक्ति एवं स्रोत की खोज की।  यह प्रश्न, जो सतह पर सरल प्रतीत होता है, मेरे लिए एक गहन आत्म-निरीक्षण का कारण बन गया। आप पूछते हैं कि यह सृजन का स्रोत, यह कथाओं का उद्गम, कहाँ से आता है, जो मेरी पुस्तकों को जीवन देता है? मैं इसका उत्तर देने का प्रयास करता हूँ, पर शायद वह उत्तर उतना रहस्यमय नहीं जितना आप कल्पना करते हैं। मित्र, मेरे पास कोई अलौकिक शक्ति नहीं, न ही कोई ऐसी जादुई छड़ी जो अनायास ही शब्दों को कागज पर नचाती हो। मेरी लेखनी का रहस्य, यदि इसे रहस्य कहें, मेरे जीवन की उस साधारण किंतु जटिल सत्यता में छिपा है, जो मेरे...

पौष्टिक आहार

 पौष्टिक आहार  पोषण आहार के संबंध में पढ़ाते हुये मास्टर साहब बच्चों से बोले सुनो बच्चों ऐ तुम हम जो दूध पीते हैं वह कहां से आता है? पहले वाले ने कहा मां से जिन्होंने मुझे बचपन से दूध पिलाया और बड़ा किया। दूसरा बच्चा बोला बाजार से उसके पिता जी गाय भैंस नहीं पालते थे सो खरीद कर लाया करते थे। तीसरा बच्चा बोला मास्टर जी मैं ने तो सिर्फ दूध पीना सीखा है किसी को लाते नहीं देखा हां कभी कभी दादा जी को गाय के थन से निकालते देखा है। चौथा बच्चा बोला मास्टर साहब अब पूछ ही रहें हैं तो सोचा बता दूं। क्या बताऊं मास्टर साहब हम अपने माता-पिता के साथ घर के तीसरी मंजिल पर रहते हैं। मेरी मां सुबह-शाम घर की तीसरी मंजिल से नीचे बाल्टी लटका देती है और एक अंकल मोटरसाइकिल से आते हैं वो एक बर्तन में डाल कर बाल्टी रख देते हैं और इस तरह मेरे घर में दूध बाल्टी से होकर आता है। मास्टर जी आप बताये आपके घर में दूध कहां से आता है? मास्टर साहब क्या बोलते? बोले भाई मैं तो दूध पीता ही नहीं मुझे इस संबंध में कुछ पता नहीं। पांचवां बच्चा उठा बोला फिर ये बताइये मास्टर साहब जब आप जानते ही नहीं तो हम बच्चों के दिमाग क...