भ्रम
भ्रम
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अच्छे की चाह में बुरा बना आदमी
जब आई होशो हवास तो कहां खरा आदमी
कह रहा था वो मसखरा सभी रास्ते
बस वहीं तक जाता है जहां से चला आदमी
नेक नीयती के शब्द झूठे लगे
सच्चाई की राह पर देखो भूखों मरा आदमी
अस्मत लूटी बला की खूबसूरती पर वेबा की
सब लोग कह रहे देख लो वो कहां गिरा आदमी ईश्वर अंधा पाप पे पुण्य पे देता है कष्ट भी
जो दिल से नेक है नाहक सजा उसे ही मिलता
बदी किया फला फूला लो पाप का घड़ा भरा
आदमी ही आदमी को पालता है भ्रम बस ।
©®भुवनेश्वर चौरसिया *भुनेश*
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