तारीफ

तारीफ
-----------
विम्मी अपने पति संग बाजार गई थी। उसके हाथ में लौटने पर तकिया ही तकिया पिल्लो ही पिल्लो था।
उसकी सहेली बोली अरे विम्मो ये तकिया कितने की लाई?
विम्मी शरमाते हुए बोली "पचास में बिकने वाली तकिया दो सौ की लाई और इस तरह बाजार में पति संग मैं ने
अपनी अक्लमंदी दिखाई। 
माथा पकड़ते हुए कम्मो वोली
ऐ जीजी कल मैं भी बाजार जाऊंगी।
साले कपड़े बेचने वाले ने मेरे कू उल्लू बनाया। मुझसे तो साले ने पांच सौ रुपए लिए थे।
© भुवनेश्वर चौरसिया "भुनेश"

Comments

Popular posts from this blog

कल्पना शक्ति

जे हम जानतिह

छुट्टी