कदम ताल

कदम ताल
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उभरते हुए शायर ने कहा
तूं भी गजल कह
दो मतला इधर से उठा
दो मतला उधर से उठा
इस तरह अपनी गजल
लिख कर पढ़
ग़ज़लों की दुनिया में
अपना नन्हा कदम रख
ताल मत मिला
गजल गाई जाती है
कही जाती है।
© भुवनेश्वर चौरसिया "भुनेश"

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