छुट्टी ------ आज दशहरे की छुट्टी थी सब लोग घर पर थे और मैं काम पर जा रहा था । दवा कम्पनी में नौकरी करता हूं दवा कम्पनियां त्योहारों की छुट्टियां नहीं देती । और छुट्टियों के अलग से पैसा भी नहीं देती। मेरा पड़ोसी बोला अरे चौरसिया जी ये छुट्टी के दिन भी सुबह-सुबह लंच बॉक्स लेकर कहां चले? मैं ने कहा जी कुछ जिन्दगियां बचाने बोले वो कैसे? मैं ने कहा जी ! मैं एक दवा सप्लाई करने वाली कंपनी में फिल्ड वर्कर हूं मेरा काम दुकानों तक अस्पतालों तक दवाईयां पहुंचाना होता है और आज के इस बीमार युग में जहां दुनियाभर के लोग रोटी से ज्यादा दवाईयां खाता हो और यदि मेरी वजह से किसी के पास दवाईयां नहीं पहुंचती है और किसी को कुछ हो जाता है तो मुझे बहुत दुःख होगा। पड़ोसी बोला आपको क्यों दुःख होगा? मैं ने कहा पिछले दिनों एक अस्पताल में दवाई देने गया वहां किसी दूसरी दवा एजेंसी से किसी मरीज को दी जाने वाली दवाइयां आनी थी वह समय पर नहीं पहुंचा तब एक आदमी असमय ईश्वर के पास पहुंच गया उस दिन कसम खाई चाहे आंधी बारिश तूफान ही क्यों न आ जाए मुझे काम पर जाना ही होगा चाहे इस छुट्टी वाले दिन क...
पौष्टिक आहार पोषण आहार के संबंध में पढ़ाते हुये मास्टर साहब बच्चों से बोले सुनो बच्चों ऐ तुम हम जो दूध पीते हैं वह कहां से आता है? पहले वाले ने कहा मां से जिन्होंने मुझे बचपन से दूध पिलाया और बड़ा किया। दूसरा बच्चा बोला बाजार से उसके पिता जी गाय भैंस नहीं पालते थे सो खरीद कर लाया करते थे। तीसरा बच्चा बोला मास्टर जी मैं ने तो सिर्फ दूध पीना सीखा है किसी को लाते नहीं देखा हां कभी कभी दादा जी को गाय के थन से निकालते देखा है। चौथा बच्चा बोला मास्टर साहब अब पूछ ही रहें हैं तो सोचा बता दूं। क्या बताऊं मास्टर साहब हम अपने माता-पिता के साथ घर के तीसरी मंजिल पर रहते हैं। मेरी मां सुबह-शाम घर की तीसरी मंजिल से नीचे बाल्टी लटका देती है और एक अंकल मोटरसाइकिल से आते हैं वो एक बर्तन में डाल कर बाल्टी रख देते हैं और इस तरह मेरे घर में दूध बाल्टी से होकर आता है। मास्टर जी आप बताये आपके घर में दूध कहां से आता है? मास्टर साहब क्या बोलते? बोले भाई मैं तो दूध पीता ही नहीं मुझे इस संबंध में कुछ पता नहीं। पांचवां बच्चा उठा बोला फिर ये बताइये मास्टर साहब जब आप जानते ही नहीं तो हम बच्चों के दिमाग क...
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