लघुकथा

लघुकथा 

समय 

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बागवान चाहता था कि उसके बागों में लगे एक भी फूल मुरझाने न पाये।

लेकिन वह ये कभी नहीं चाहता था कि उसके बागानों में जो फूल खिले हुए हैं। उनके जड़ों को जल से सिंचित किया जाए।

एक दिन किसी ने उसके बाग से चुपके से कुछ फूल तोड़ लिया।

वह दुखी बैठा था।

तब उसके एक शुभ चिंतक ने उसके दुःख का कारण पूछा।

बागवान ने कहा भाई मैं अपने बागों में लगे फूलों को मुरझाते हुए नहीं देखना चाहता।

लेकिन मजबूर हूॅं। जब भी उन फूल के पौधों की सिंचाई करता हूं।

फूल खिलते हैं लोग तोड़ ले जाते हैं। क्या करूं? कुछ समझ नहीं आता समय बहुत खराब है किस किस से लड़ूं।

शुभ चिंतक इतनी सी बात फूलों के पौधों के आगे बाड़ लगा दो।

बागवान ने जबाव देते हुए कहा कांटों के बीच से फूल तोड़ ले जाते हैं बाड़ किया करेगा।

कुछ और सोचते हैं।

और उसने फूलों को पानी देना बंद कर दिया।

©® भुवनेश्वर चौरसिया 'भुनेश' 

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